निक़ाह के बाद मिस्री व खजूर (ख़ारक) लुटाना...

निक़ाह के बाद मिस्री व खजूर (ख़ारक) लुटाना...

◆ निकाह के बाद मिस्री व खजूर (ख़ारक)  बांटना बहुत अच्छा है यह रवाज हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़ाहिरी ज़माने में भी था...

◆ आला हज़रत अश्शाह इमाम अहमद रज़ा ख़ान अलैहिर्रहमा फ़रमाते है "(निकाह के बाद) छुवारे (खजूर) हदीस शरीफ़ में लूटने का हुक़्म है...और लुटाने में भी कोई हर्ज नही और यह हदीस "दारक़ुतनी" व "बेहिक़ी" व "तहावी" से मरवी है"!

◆ लिहाज़ा निकाह के बाद खजूर,मिस्री, लुटाए खाये बस थोड़ा एहतियात रखे कि चीज़ बेकार न जाये और निकाह जैसी अज़ीम सुन्नत हो तब वहां जो रहमत नाज़िल होती है उसका भी ख़ूब फ़ायदा उठाये नेक और जाइज़ दुआएं भी मांगे...

📚 (अलमलफूज़,जिल्द-3,सफ़ा-16/करीनये ज़िन्दगी,सफ़ा-63)

No comments