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नबी ए करीम ﷺ का मोअजिज़ा "सूरज ठहर गया"... (Nabi E Karim ﷺ Ne Suraj Ko Rok Diya Aur Din Ko Badha Diya)


नबी ए करीम ﷺ का मोअजिज़ा "सूरज ठहर गया : (Nabi E Karim ﷺ Ne Suraj Ko Rok Diya Aur Din Ko Badha Diya)

हुज़ूर पुरनूर सल्लल्लाहो तआ़ला अ़लैहे वसल्लम के आसमानी मोअजिज़ात में से सूरज पलट आने के मोअजिज़े की त़रह़ चलते हुए "सूरज का ठहर जाना" भी एक बहुत ही अ़ज़ीम मोअजिज़ा हैं जो मेराज की रात गुज़र कर दिन में वकूअ़ पज़ीर हुआ!


चुनान्चे, यूनुस बिन बुकीर ने इब्ने इस्ह़ाक से रिवायत की हैं कि जब कुफ़्फ़ारे कुरैश ने हुज़ूर सल्लल्लाहो तआ़ला अ़लैहे वसल्लम से अपने उस काफ़िले के ह़ालात दरयाफ़्त किए जो मुल्के शाम से मक्का आ रहा था, तो आपने फ़रमाया कि :

"हां, मैने तुम्हारे उस काफ़िले को बैतुल मुक़द्दस के रास्ते में देखा हैं और वो बुध के दिन मक्का आ जाएगा"!


चुनान्चे, कुरैश ने बुध के दिन शहर से बाहर निकल कर अपने काफ़िले के आने का इन्तेज़ार किया यहां तक कि सूरज गुरूब होने लगा और काफ़िला नही आया, उस वक़्त हुज़ूरे अक़्दस सल्लल्लाहो तआ़ला अ़लैहे वसल्लम ने बारगाहे इलाही में दुआ़ मांगी तो अल्लाह तआ़ला ने सूरज को ठहरा दिया और एक घड़ी के लिए दिन को बढ़ा दिया यहां तक कि वो काफ़िला आ पहुंचा!

📚 (ज़रकानी, जिल्द-5, सफ़ह़ा-116)
📚 (शिफ़ा, जिल्द-1, सफ़ह़ा-185)
📚 (सीरतुल मुस्त़फ़ा, सफ़ह़ा-704)

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