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🔷WALIMA KE MASAIL🔷



WALIMA KE MASAIL:


HADEES SHARIF:


हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि जब तुम में से किसी को वलीमे की दावत दी जाये तो ज़रूर जाये दूसरी जगह इरशाद फरमाते हैं कि जिसको दावत दी गई और उसने क़ुबूल ना की तो उसने अल्लाह और रसूल की नाफरमानी की|

📚मुस्लिम,जिल्द 2,सफह 462-463


BINA DAWATE KE SHIRKAT KARNA KAISA HAI :


➤जो बग़ैर बुलाये दावत में गया तो वो चोर बनकर गया और लुटेरा बनकर वहां से निकला| 

📚अबु दाऊद,सफह 525

 "मगर ये बला तो आजकल आम हो चली है कि नवजवान लड़के बनठन कर घूमते रहते हैं जहां कहीं मौका लगा फौरन दावत में शरीक हो गये और कुछ बेग़ैरत तो 1 आदमी की दावत में पूरा घर भर लेकर पहुंच जाते हैं,ऐसे लोगों को ना तो अपनी इज़्ज़त की ही कोई फिक्र होती है और ना खुदा व रसूल का कोई खौफ मआज़ अल्लाह* "

🖋📝FUQHA:


⏩बाअज़ उल्मा के नज़दीक वलीमा की दावत क़ुबूल करना सुन्नत है और बाअज़ के नज़दीक वाजिब मगर बज़ाहिर यही मालूम होता है कि सुन्नते मुअक़्क़िदह है|

📚बहारे शरीयत,हिस्सा 16,सफह 30

⏩मगर दावत क़ुबूल करना उसी वक़्त सुन्नत होगी जबकि वहां कोई मुनकिराते शरईया ना हो जैसे गाना बजाना खेल तमाशा वरना क़ुबूल ना करे हां अवाम अगर सुलह रहमी की बिना पर जाना चाहे तो जा सकती है मगर ढोल ताशे पर ध्यान ना दे|

📚फतावा रज़वियह,जिल्द 9,सफह 385

➤बारात में अगर बाजा ताशा हो तो आलिम का साथ जाने में 3 सूरतें हैं:


1. अगर जानता है कि मेरे जाने से या मेरे सामने ये सब खुराफात नहीं होगी बन्द कर दी जायेगी तो ज़रूर जाये|

2. अगर जानता है कि मेरा जाना उनको अज़ीज़ है तो वाजिब है कि मुन्किरात से मना करे अगर मान जायें तो साथ जाये|

3. अगर मना करने पर भी ना माने तो जाना जायज नहीं अगर पहुंच गया और उसके सामने बाजा शुरू हो तो फौरन उठ जाये| 

📚फतावा रज़वियह,जिल्द 9,सफह 434-435

⏩ वलीमा बाद ज़ुफाफ करना सुन्नत है बेहतर है कि शबे ज़ुफाफ की सुबह को अपने दोस्त और अहबाब की दावत की जाये वरना दूसरे दिन भी हो सकती है मगर इससे ज़्यादा ताखीर करना खिलाफे सुन्नत है|

📚बहारे शरीयत,हिस्सा 16,सफह 31