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🔸माहे रमजान की खुसूसियात



RAMAZAN SHARIF KI FAZILAT :

दूसरे महिनों पर माहे रमजानुल मुबारक की फ़ज़ीलत चंद ऐतबार से है: 


कुरान शरीफ मे ये तो मज़कूर (इर्शाद) है कि महीनें 12 हैं और यह भी मज़कूर है कि उनमें चार हुर्मत वाले हैं, वह हुर्मत व इज्जत वाले महीनें कौन से है ये मजकूर नहीं, लेकिन माहे रमजानुल मुबारक का नाम कुरआन शरीफ में सराहत के साथ मज़कूर है बाकी किसी भी महिने का नाम सराहत के साथ मज़कूर नहीं, जैसा कि अल्लाह तआला इर्शाद फ़रमाया :-

तर्जमा :- रमज़ान का महिना जिसमे कुरआन शरीफ नाज़िल हुआ |



➤माहे रमज़ान में कुर्आन शरीफ़ नाज़िल हुआ|

➤इसी माह में शबे कद्र है, जिसका क़याम (इबादत और शब बैदारी) हज़ार महिनों के कयाम से बहेतर है|

➤हर महिने में इबादत के लिए वक्त मुकर्रर है मगर इस महिने में रोजे-दार का लम्हा लम्हा इबादत में शुमार होता है़ |

➤रमज़ान शरीफ में नेकियों का सवाब 10 गुना से 700 गुना तक बढ़ा दिया जाता हैं |

➤नफ्ल का सवाब फ़र्ज के बराबर और फ़र्ज का सवाब 70 फ़र्ज के बराबर हो जाता है |

➤अल्लाह तआला इस महिने में अपने बंदो पर खुसूसी तवज्जह फर्माता है |

➤जन्नत के दरवाजे ख़ोल दिये जाते है|

➤जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिये जाते है|

➤आसमान के दरवाजे खोल दिये जाते हैं और बंदो की जायज़ दूआ ऐ बाबे इजाबत तक बिलकुल आसानी के साथ पहुँच जाती है|

➤हज़रत ईब्राहिम अलैहिस्सलाम को सहीफे ईसी महिने कि एक तारीख को नाज़िल हुए |

➤तौरात शरीफ़ रमज़ानुल मुबारक की 6 तारीख को नाज़िल हुई |

➤इन्जिल शरिफ़ रमजा़नुल मुबारक की 13 तारीख को नाज़िल हुई |

➤कुर्आन शरीफ़ रमज़ानुल मुबारक की 24 तारीख को नाज़िल हुआ |

➤जंगे बद्र इसी माह की 17 तारीख को 
हुई|

➤फत्तेह मक्का इसी माह की 20 तारीख को 
हुई|

➤हज़रत अली रजियल्लाहु अन्हु की शहादत रमजानुल मुबारक की 21 तारीख को 
हुई|



(माहे रमज़ान कैसे गुज़ारे सफ़ा नं 21)