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GUSL KA TARIKA,NAHANE KA TARIKA,GUSL KAB FARZ HOTA HAI.

"ऐ ईमान वालो नशे की हालत में नमाज़ के करीब न जाओ यहाँ तक की समझने लगो जो कहते हो और न जनाबत की हालत में जब तक ग़ुस्ल न कर लो मगर सफर की हालत में कि वहाँ पानी न मिले तो ग़ुस्ल की जगह तयम्मुम है | "

( कुरान मज़ीद )





GUSL KAB FARZ HOTA HAI :

ग़ुस्ल इन 5 बातों से फ़र्ज़ होता है:


1. मनी का शहवत के साथ निकलना (चाहे माज़ अल्लाह हाथ से निकाले)
2. एहतेलाम यानि nightfall हो
3. सोहबत करने से
4. हैज़ (m c) के बाद
5. निफ़ास (बच्चे की पैदाइश के बाद)

*इसके अलावा कैसी ही नजासत लगे क़तरा गिरे उसका धोना फ़र्ज़ है ग़ुस्ल फ़र्ज़ नहीं*


GUSL KE 3 FARZ HAI :


1. कुल्ली इस तरह करना की होंट से हलक़ तक दांतो की सारी जड़ में पानी पहुंच जाये
2. नाक की नर्म हड्डी तक पानी चढ़ाना
3. सर से लेकर पैर तक ऐसा पानी बहाना कि 1 बाल बराबर जगह भी सुखी न रहे,इन तीनो में से कुछ भी छूटा तो हरगिज़ ग़ुस्ल नहीं होगा और जब गुस्ल नहीं हुआ तो वुज़ु नहीं होगा और जब वुज़ु नहीं होगा तो नमाज़ कहां से होगी.


GUSL KI SUNNATE :

*ग़ुस्ल की सुन्नते*

! नियत करना

! दोनों हाथ गट्टो तक धोना

! इस्तिन्जा की जगह या कहीं नजासत लगी हो तो पहले उसे धोना

! वुज़ू करना

! बदन पे पानी मलना

! 3 बार दाए कंधों पर 3 बार बाएं कंधों पर फिर सर से पानी डालना

! किबला रुख न होना

! ऐसी जगह नहांये की कोई ना देखे

! नहाते हुए बात या कोई दुआ न पढ़े


GUSL KE JARURI MASAIL:




*मसअला* - अगर पेशाब के साथ मनी के कुछ कतरात आ जाये तो गुस्ल फ़र्ज़ नहीं.

*मसअला* - युंहि अगर बिला शहवत मनी के कुछ कतरे निकल आये तो वुज़ु टूट जायेगा मगर गुस्ल फ़र्ज़ नहीं.

*मसअला* - अगर ख्वाब याद है मगर कपड़ों पर कुछ असरात मनी के मौजूद नहीं तो गुस्ल फ़र्ज़ नहीं.

*मसअला* - और अगर कपड़ों पर मनी या मज़ी के निशान है और ख्वाब याद नहीं तो गुस्ल फ़र्ज़ है.

*मसअला* - जिनपर गुस्ल फ़र्ज़ है उनको मस्जिद मे जाना,क़ुरान मजीद छूना,ज़बान से क़ुरान की आयत पढ़ना,किसी आयत का लिखना हराम है युंहि क़ुरान की नुक़ूश वाली अगूठी पहन्ना भी.

*मसअला* - जिनपर गुस्ल फ़र्ज़ है अगर उन्होने हाथ धोने से पहले किसी बाल्टी या टब में हाथ डाल दिया बल्कि सिर्फ नाखून ही डुबो दिया तो सारा पानी मुशतमिल हो गया अब उससे गुस्ल या वुज़ू कुछ नहीं हो सकता,इस बात का खयाल रखें अगर कोई गुस्ल खाने मे बरहना होकर नहाता है और नहाने से पहले या बाद को कुल्ली करता और नाक में पानी चढ़ा लेता है,उसका गुस्ल हो गया और जिसने गुस्ल कर लिया उसका वुज़ू भी हो गया.



📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 2,सफ़ह 30----43