SHIYA KA AQUIDA KYA HAI ?



SHIYA KA AQUIDA KYA HAI ?


जैसा कि आपने सुना ही होगा कि मेरे आक़ा सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि मेरी उम्मत में 73 फिरके होंगे उसमें से एक ही जन्नती होगा और 72 हमेशा जहन्नम में रहेंगे उन्ही जहन्नमी फिरकों में राफजी यानि शिया भी एक फिरका है,ये अपने आपको शैदाइये अहले बैत कहता है और उनके इसी या अली या हुसैन कहने पर हमारे बहुत से सुन्नी मुसलमान धोखा खा जाते हैं और उन्हें काफिर कहने से परहेज़ करते हैं मगर ये क़ौम अहले बैते अत्हार की मुहब्बत की आड़ लेकर ना जाने कितने ही कुफ्रिया अक़ायद रखती है,वैसे तो हुक्मे कुफ्र एक ही ज़रूरियाते दीन के इन्कार पर लग जाता है मगर इनके यहां तो कुफ्र की भरमार है,इनकी चंद कुफ्री इबारतें पेश करता हूं मुलाहज़ा फरमायें

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शिया अक़ायद - मुहम्मद सल्लललाहु अलैहि वसल्लम ने जिस खुदा की ज़ियारत की वो कुल 30 साल का था, मआज़ अल्लाह 

📕 उसूले काफी,जिल्द 1,सफह 49

सुन्नी अक़ायद - बेशक खुदा तआला जिस्म जिस्मानियत से पाक है  

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 1,सफह 3
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शिया अक़ायद - अल्लाह तआला कभी कभी झूठ भी बोलता है,मआज़ अल्लाह 

📕 उसूले काफी,जिल्द 1,सफह 328

सुन्नी अक़ायद - और अल्लाह से ज़्यादा किसी की बात सच्ची नहीं 

📕 पारा 5,सूरह निसा,आयत 122 
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शिया अक़ायद - अल्लाह तआला गलती भी करता है,मआज़ अल्लाह

📕 उसूले काफी,जिल्द 1,सफह 328

सुन्नी अक़ायद - बेशक अल्लाह तआला हर ऐब से पाक है 

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 1,सफह 4
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शिया अक़ायद - अल्लाह तआला ने हज़रत जिब्रील को पैग़ामे रिसालत देकर अली के पास भेजा था लेकिन वो गलती करके मुहम्मद सल्लललाहु अलैहि वसल्लम के पास चले गए,मआज़ अल्लाह 

📕 अनवारुल नोमानिया,सफह 237
📕 तज़किरातुल अइम्मा,सफह 78

सुन्नी अक़ायद - और वो (फरिश्ते) कभी भी कुसूर (गलती) नहीं करते 

📕 पारा 7,सूरह इनआम,आयत 61
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शिया अक़ायद - हज़रत अली खुदा हैं,मआज़ अल्लाह 

📕 तज़किरातुल अइम्मा,सफह 77 

सुन्नी अक़ायद - अल्लाह एक है 

📕 पारा 30,सूरह अहद,आयत 1
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शिया अक़ायद - तमाम सहाबा सिवाये तीन चार को छोड़कर सब मुर्तद हैं,मआज़ अल्लाह 

📕 फरोग़े काफी,जिल्द 3,सफह 115

सुन्नी अक़ायद - और उन सबसे (सहाबा) अल्लाह जन्नत का वादा फरमा चुका 

📕 पारा 27 सूरह हदीद,आयत 10
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शिया अक़ायद - मौजूदा क़ुर्आन नाक़िस है और क़ाबिले हुज्जत नहीं,मआज़ अल्लाह 

📕 उसूले काफी,जिल्द 1,सफह 26-263

सुन्नी अक़ायद - वो बुलंद मर्तबा किताब (क़ुर्आन) जिसमे शक की कोई गुंजाइश नहीं 

📕 पारा 1,सूरह बक़र,आयत 1
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शिया अक़ायद - मौजूदा क़ुर्आन तहरीफ शुदा है,मआज़ अल्लाह

📕 हयातुल क़ुलूब,जिल्द 3,सफह 10

सुन्नी अक़ायद - बेशक हमने उतारा है ये क़ुर्आन और बेशक हम खुद इसके निगहबान हैं 

📕 पारा 14,सूरह हजर,आयत 8
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शिया अक़ायद - क़ुर्आन को हुज़ूर के विसाल के बाद जमा करना उसूलन गलत था,मआज़ अल्लाह 

📕 हज़ार तुम्हारी दस हमारी,सफह 560

सुन्नी अक़ायद - हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपनी ज़िन्दगी में ही क़ुर्आन को तरतीब दे दिया था लेकिन किताबी शक्ल में जमा करने की सआदत हज़रते अबू बक्र सिद्दीक़ को हासिल है 

📕 तफसीरे नईमी,जिल्द 1,सफह 114
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शिया अक़ायद - मर्तबये इमामत पैगम्बरी से अफज़ल व आला है,मआज़ अल्लाह 

📕 हयातुल क़ुलूब,जिल्द 3,सफह 2

सुन्नी अक़ायद - जो किसी ग़ैरे नबी को नबी से अफज़ल बताये काफिर है 

📕 बहारे शरीयत,हिस्सा 1,सफह 15
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शिया अक़ायद - हज़रत आईशा का शरीयत से कुछ ताल्लुक़ नहीं और वो वाजिबुल क़त्ल हैं,मआज़ अल्लाह

📕 शरियत और शियाइयत,सफह 45
📕 बागवाये बनी उमय्या और माविया,सफह 474

सुन्नी अक़ायद - हज़रते आईशा सिद्दीका की शानो अज़मत में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने क़ुर्आने करीम की सूरह नूर में 17 या 18 आयतें नाज़िल फरमाई और उनसे 2210 हदीस मरवी है 

📕 मदारेजुन नुबूवत,जिल्द 2,सफह 808
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शिया अक़ायद - मौला अली का इमामत को तर्क कर देने से खुल्फाये सलासा मुर्तद हो गए,मआज़ अल्लाह 

📕 उसूले काफी,जिल्द 1,सफह 420

सुन्नी अक़ायद - हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अशरये मुबश्शिरा यानि 10 सहाबये किराम का नाम लेकर जन्नती होने की गवाही दी जिनमें खुल्फाये सलासा भी शामिल हैं 

📕 इबने माजा,जिल्द 1,सफह 61
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शिया अक़ायद - हज़रत उमर बड़े बेहया थे,मआज़ अल्लाह 

📕 नूरुल ईमान,सफह 75 

सुन्नी अक़ायद - हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मेरे बाद अगर कोई नबी होता तो उमर होते

📕 तिर्मिज़ी,हदीस 3686 
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शिया अक़ायद - हज़रत उसमान गारत गर था और उनकी खिलाफत में फहहाशी का सिलसिला शुरू हुआ,मआज़ अल्लाह 

📕 कशफुल इसरार,सफह 107

सुन्नी अक़ायद - हज़रते उसमान ग़नी शर्मिले तबियत के मालिक हैं 

📕 शाने सहाबा,सफह 114
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शिया अक़ायद - जिस ने एक बार मूता किया उसका मर्तबा हज़रते हुसैन के बराबर और जिसने दो बार मूता किया उसका मर्तबा हज़रते हसन के बराबर और जिसने तीन बार मूता किया उसका मर्तबा हज़रते अली के बराबर और जिसने चार बार मूता किया उसका मर्तबा नबी के बराबर हो जाता है,मआज़ अल्लाह

📕 बुरहाने मूता व सवाबे मूता,सफह 52 

सुन्नी अक़ायद - मूता हराम है 

📕 तोहफये अस्नये अशरिया,सफह 67
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"मूता एग्रीमेंट मैरिज को कहते हैं मतलब ये कि अगर निकाह से पहले कोई मुद्दत तय की गयी मसलन 1 दिन के लिए या 1 हफ्ते के लिए या 1 महीने के लिए या 1 साल के लिए गर्ज़ की कोई भी मुद्दत तय हुई कि इतने दिन के लिए हम शादी करते हैं तो ये निकाह हराम मिस्ल ज़िना है,जो कुछ मैंने यहां ज़िक्र किया वो तो बस चंद बातें हैं वरना इन काफिरों की किताबों में तो सैकड़ों ही कुफरी इबारतें भरी पड़ी है,अगर ऐसा अक़ीदा रखने वाले सिर्फ ज़बानी अहले बैत अतहार का नाम लें तो क्या उन्हें मुसलमान समझ लिया जायेगा नहीं और हरगिज़ नहीं,अब हदीसे पाक में इस जहन्नमी फिरके का तज़किरा भी पढ़ लीजिए मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि"


हदीस - आखिर ज़माने में एक क़ौम पाई जायेगी जिसका एक खास लक़ब होगा इन्हें राफज़ी कहा जायेगा ये हमारी जमात में होने का दावा करेगा मगर ये हम में से नहीं होगा इनकी पहचान ये होगी कि ये हज़रत अबु बकर व हज़रत उमर को बुरा कहेंगे

📕 कंज़ुल उम्माल,जिल्द 6,सफह 81

फुक़्हा - राफज़ियों को काफिर कहना ज़रूरी है ये फिरका इस्लाम से खारिज है मुर्तदीन के हुक्म में है

📕 फतावा आलमगीरी,जिल्द 3,सफह 264


SUNNI AUR SHIYA



ⓩ Jaisa ki aapne suna hi hoga ki mere aaqa sallallaho taala alaihi wasallam irshaad farmate hain ki meri ummat me 73 firke honge usme se ek hi jannati hoga aur 72 hamesha jahannam me rahenge,unhi jahannami firko me raafji yaani shiya bhi ek firka hai,ye apne aapko shaidaiye ahle bait kahta hai aur unke isi YA ALI YA HUSAIN kahne par hamare bahut se sunni musalman dhokha khaa jaate hain aur unhein kaafir kahne se parhez karte hain magar ye qaum ahle baite athaar ki muhabbat ki aad lekar na jaane kitne hi kufriya aqayad rakhti hai,waise to hukme kufr ek hi zaruriyate deen ke inkaar par lag jaata hai magar inke yahan to kufr ki bharmaar hai,inki chund kufri ibaratein pesh karta hoon mulahza farmayen

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SHIYA AQAYAD - MUHAMMAD sallallaho alaihi wasallam ne jis khuda ki ziyarat ki wo kul 30 saal ka tha,maaz ALLAH

📕 Usoole kaafi,jild 1,safah 49

SUNNI AQAYAD - Beshak khudaye taala jism jismaniyat se paak hai

📕 Bahare shariyat,hissa 1,safah 3

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SHIYA AQAYAD - ALLAH taala kabhi kabhi jhoot bhi bolta hai aur galti bhi karta hai,maaz ALLAH

📕 Usoole kaafi,jild 1,safah 328

SUNNI AQAYAD - Aur ALLAH se zyada kisi ki baat sachchi nahin

📕 Paara 5,surah nisa,aayat 122

Aur wo har aib se paak hai

📕 Bahare shariyat,hissa 1,safah 4

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SHIYA AQAYAD - ALLAH taala ne hazrat jibreel ko paighame risalat dekar ali ke paas bheja tha lekin wo galti karke MUHAMMAD sallallaho alaihi wasallam ke paas chale gaye,maaz ALLAH 

📕 Anwarul nomania,safah 237
📕 Tazkiratul ayimma,safah 78

SUNNI AQAYAD - Aur wo (farishte) kabhi bhi kusoor (galti) nahin karte

📕 Paara 7,surah inaam,aayat 61

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SHIYA AQAYAD - Hazrat ali khuda hain,maaz ALLAH

📕 Tazkiratul ayimma,safah 77

SUNNI AQAYAD - ALLAH ek hai

📕 Paara 30,surah ahad,aayat 1

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SHIYA AQAYAD - Tamam sahaba siwaye teen chaar ko chhodkar sab murtad hain,maaz ALLAH

📕 Faroge kaafi,jild 3,safah 115

SUNNI AQAYAD - Aur un sabse (sahaba) ALLAH jannat ka waada farma chuka

📕 Paara 27 surah hadeed,aayat 10

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SHIYA AQAYAD - Maujuda quran naaqis hai aur qaabile hujjat nahin,maaz ALLAH

📕 Usoole kaafi,jild 1,safah 26-263

SUNNI AQAYAD - Wo buland martaba kitab (quran) jisme shak ki koi gunjayish nahin

📕 Paara 1,surah baqar,aayat 1

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SHIYA AQAYAD - Maujuda quran tahreef shuda hai,maaz ALLAH 

📕 Hayatul quloob,jild 3,safah 10

SUNNI AQAYAD - Beshak humne utaara hai ye quran aur beshak hum khud iske nigehbaan hain

📕 Paara 14,surah hajar,aayat 8

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SHIYA AQAYAD - Quran ko huzoor ke wisaal ke baad jama karna usulan galat tha

📕 Hazaar tumhari dus hamari,safah 560

SUNNI AQAYAD - Huzoor sallallaho taala alaihi wasallam ne apni zindagi me hi quran ko tarteeb de diya tha lekin kitabi shakl me jama karne ki saadat hazrate abu bakr siddiq ko haasil hai 

📕 Tafseere nayimi,jild 1,safah 114

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SHIYA AQAYAD - Martabaye imaamat paigambari se afzal wa aala hai,maaz ALLAH

📕 Hayatul quloob,jild 3,safah 2

SUNNI AQAYAD - Jo kisi gaire nabi ko nabi se afzal bataye kaafir hai

📕 Bahare shariyat,hissa 1,safah 15

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SHIYA AQAYAD - Hazrat aaisha ka shariyat se kuchh taalluq nahin aur wo wajibul qatl hain,maaz ALLAH

📕 Shariyat aur shiyaiat,safah 45
📕 Baagwaye bani umayya wa maaviya,safah 474

SUNNI AQAYAD - Hazrate aaysha siddiqa ki shaano azmat me ALLAH rabbul izzat ne qurane kareem ki surah noor me 17 ya 18 aaytein naazil farmayin,aur unse 2210 hadees marwi hai

📕 Madarejun nubuwat,jild 2,safah 808

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SHIYA AQAYAD - Maula ali ka imaamat ko tark kar dene se khulfaye salaasa murtad ho gaye,maaz ALLAH

📕 Usoole kaafi,jild 1,safah 420

SUNNI AQAYAD - Huzoor ne ashraye mubasshira yaani 10 sahaba ikraam ka naam lekar jannati hone ki gawaahi di jinme khulfaye salaasa bhi shaamil hain

📕 Ibne maaja,jild 1,safah 61

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SHIYA AQAYAD - Hazrat umar bade behaya the,maaz ALLAH

📕 Noorul imaan,safah 75

SUNNI AQAYAD - Huzoor farmate hain ki mere baad koi nabi hota to umar hote

📕 Tirmizi,hadees 3686

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SHIYA AQAYAD - Hazrat usman gaarat gar tha aur unki khilafat me fahhashi ka silsila shuru hua,maaz ALLAH 

📕 Kashaful israar,safah 107

SUNNI AQAYAD - Hazrate usman gani sharmili tabiyat ke maalik hain

📕 Shaane sahaba,safah 114

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SHIYA AQAYAD - JIs ne ek baar moota kiya uska martaba hazrate husain ke barabar aur jisne do baar moota kiya uska martaba hazrate hasan ke barabar aur jisne teen baar moota kiya uska martaba hazrate ali ke barabar aur jisne chaar baar moota kiya uska martaba nabi ke barabar ho jaata hai

📕 Burhane moota wa sawabe moota,safah 52

SUNNI AQAYAD - Moota haraam hai

📕 Tohfaye asna ashriya,safah 67

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ⓩ Moota agreement marriage ko kahte hain matlab ye ki agar nikah se pahle koi muddat tai ki gayi maslan 1 din ke liye ya 1 hafte ke liye ya 1 mahine ke liye ya 1 saal ke liye garz ki koi bhi muddat tai huyi ki itne din ke liye hum shaadi karte hain to ye nikah haraam misl zina hai,Jo kuchh maine yahan zikr kiya wo to bas chund baatein hain warna in kaafiron ki kitabon me to saikdon hi kufri ibaaratein bhari padi hai,agar aisa aqeeda rakhne waale sirf zabani ahle bait athaar ka naam lein to kya unhein musalman samajh liya jayega nahin aur hargiz nahin,ab hadeese paak me is jahannami firke ka tazkira bhi padh lijiye maula ali raziyallahu taala anhu farmate hain ki

HADEES - Aakhir zamane me ek qaum paayi jayegi jiska ek khaas laqab hoga inhein raafji kaha jayega ye hamari jamaat me hone ka daawa karega magar ye humme se nahin inki pahchaan ye hogi ki ye hazrat abu bakr wa hazrat umar ko bura kahenge

📕 Kanzul ummal,jild 6,safah 81

FUQHA - Raafjiyon ko kaafir kahna zaruri hai ye firka islaam se khaarij hai murtadeen ke hukm me hai

📕 Fatawa aalamgiri,jild 3,safah 264