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ज़िना और लिवातत की दर्दनाक सज़ाये,शेयर करे ताकि हमारे भाई और बहन इस अज़ीम गुनाह से महफूज़ रहे...




ज़िना इतना ज़्यादा बुरा और घिनौना जुर्म है कि किसी भी मज़हब में इसको जायज़ नहीं रखा गया, और इस्लाम में तो इस पर बहुत सख्त हुक्म है, मौला फरमाता है कि... 



➤ ज़िना के पास ना जाओ यक़ीनन वो बे हयाई और बहुत बुरी राह है.

 पारा 15,बनी इस्राइल,आयत 32

➤ और जो ये काम (ज़िना) करेगा वो सज़ा पायेगा
 पारा 19,फुरक़ान,सफह 68

➤ और मेरे आक़ा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि जब कोई ज़िना करता है तो ईमान उससे निकलकर उसके सर पर साये की तरह मुअल्लक़ हो जाता है.

 मिश्कात,सफह 18

➤ दुनिया में इसकी क्या सज़ा है इसके बारे में मौला तआला क़ुर्आन में इरशाद फरमाता है कि जो औरत ज़िनाकार हो और जो मर्द ज़िनाकार हों तो हर एक को 100 कोड़े मारो,और तुम्हे उन पर तरस ना आये अल्लाह के दीन में अगर तुम ईमान लाते हो अल्लाह और क़यामत पर,और चाहिए कि उनकी सज़ा के वक़्त मुसलमानों का एक गिरोह हाज़िर रहे

 पारा 18,नूर,सफह 12



ये हुक्म तो उस ज़ानी का है जो कि कुंवारे हों वरना शादी शुदा ज़ानी का हुक्म तो ये है कि उन्हें पत्थर मार मार कर मार डाला जाए और इसका हुक्म रज्म की आयत से है जो कि मनसूखुत तिलावत है मगर हुक्म अब भी बाकी है, और क़यामत में ज़ानियों की क्या सज़ा है ये भी पढ़ लीजिये हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि

➤ कुछ नंगे मर्द और नंगी औरतें जहन्नम के अंदर एक तन्नूर में ठुसे होंगे जो कि ऊपर से तंग और नीचे से फैला होगा, जब आग भड़केगी तो ये शोलो के साथ ऊपर तक आ जायेंगे और फिर उसी के साथ उसी गर्त में पहुंच जायेंगे और ऐसा हमेशा होता रहेगा

 बुखारी,जिल्द 1,सफह 185

हां मगर इन सब सज़ाओं से बचा जा सकता है पहला तो ये कि या तो इन सब बदतरीन गुनाहों के करीब ही ना जाया जाए या फिर माज़ अल्लाह अगर ये जुर्म कर चुका है तो सच्चे दिल से तौबा करले और आईन्दा के लिए कभी इस गुनाह के करीब भी ना जाए,एक अहम बात कुछ नादान लोग ये समझते हैं कि ज़िना सिर्फ ज़बरदस्ती का नाम है नहीं बल्कि निकाह के अलावा किसी भी तरह से चाहे वो कीमत देकर या फिर लिव इन रिलेशन के नाम पर अगर औरत के साथ सेक्स किया तो ये ज़िना ही कहलायेगा, इसी तरह लिवातत या इगलाम बाज़ी यानि औरत के पीछे के मक़ाम में सोहबत करना या मर्द से सोहबत करना हराम और जहन्नम में जाने का रास्ता है, ये क़बीह फेअल सबसे पहले हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की उम्मत में शुरू हुआ जिसकी सज़ा में उन पर पत्थरों की बारिश हुई और सबके सब हलाक़ हो गए, हदीसे पाक में है कि



➤ वो शख्स लाअनती है जो औरत से हालते हैज़ में या पीछे के मक़ाम में सोहबत करे और अगर उसे जायज़ जाने जब तो काफिर है.

 तिर्मिज़ी,जिल्द 1,सफह 19
 अलइतहाफ,जिल्द 5,सफह 375

➤ हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने 3 बार उस मर्द पर लाअनत फरमाई जो मर्द से सोहबत करे.

 अलमुअज्जमुल कबीर,जिल्द 11,सफह 218

➤ हज़रते अबु बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के मशवरे से उस ज़माने के एक बदफेल शख्स को आग में जलवा दिया जिसे हज़रत खालिद बिन वलीद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने जलाया.

 अत्तरगीब वत्तर्हीब,जिल्द 3,सफह 289

➤ नबी करीम सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया जिसने अपने गुनाहों से सच्ची तौबा कर ली तो वो ऐसा है जैसे आज ही पैदा हुआ हो.
 मुकाशिफातुल क़ुलूब,सफह 76

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