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जानिए! जन्नत की वो नहर जिसका पानी दूध से ज्यादा सफेद और शहद से ज्यादा मीठा है



रजबुल मुरज्जब उन चार मुक़द्दस महीनो में शामिल है जिनका ज़िक्र क़ुरान में मौजूद है यानि ज़िल क़ायदा, ज़िल हज्ज, मुहर्रम और रजब.

📕 खज़ाएनल इरफान,सफह 229



रजब तरज़ीब से मअखूज़ है जिसका माने हैं ताज़ीम करना अहले अरब इस महीने की खूब ताज़ीम करते थे और इसे अल्लाह का महीना कहते थे,इस महीने की पहली तारीख को हजरत नूह अलैहिस्सलाम कश्ती पर सवार हुए इसी माह की चार तारीख को जंगे सिफ्फीन का वाक़िया पेश आया और इसी महीने की 27वीं शब को हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम को जिस्मे अनवर के साथ मेराज शरीफ हुई.

📕 बारह माह के फज़ायल,सफह 392

हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि रजब अल्लाह का महीना है और शाबान मेरा महीना है और रमज़ान मेरी उम्मत का महीना है और फरमाते हैं कि इस महीने में 1 रोज़े का सवाब 1 साल के रोज़े के बराबर है और फरमाते हैं कि रजब की फज़ीलत बाकी महीनो पर ऐसी है जैसी मेरी फज़ीलत तमाम अम्बिया पर और रमज़ान की फज़ीलत बाकी महीनो पर ऐसी है जैसी खुदा की फज़ीलत तमाम बन्दों पर और फरमाते हैं कि जो इस महीने में 7 रोज़े रखे तो उस पर जहन्नम के सातो दरवाज़े बंद हो जायेंगे और जो 8 रोज़े रखे तो उसके लिए जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जायेंगे और जो 10 रोज़े रखे तो खुदा से जो सवाल करेगा मिलेगा और जो 15 रोज़े रखे तो उसके पिछले सारे गुनाह माफ कर दिए जायेंगे

📕 मासबत मिन सुन्नह,सफह 126



रजब जन्नत में एक नहर का नाम है जिसका पानी दूध से ज़्यादा सफेद शहद से ज़्यादा मीठा और बर्फ से ज़्यादा ठंडा है वो पानी वही पियेगा जो रजब के रोज़े रखेगा

📕 मुकाशिफातुल क़ुलूब,सफह 636

एक मर्तबा हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम एक पहाड़ के करीब से गुज़रे जिसमे से नूर निकल रहा था,आप ने रब से दुआ की कि ये पहाड़ मुझसे कलाम करे,आप के इतना कहते ही पहाड़ ने आपसे पूछा कि आप क्या चाहते हैं तो आप अलैहिस्सलाम ने अर्ज़ किया कि तेरी ये चमक दमक कैसे है इस पर वो बोला कि मेरे अंदर एक मर्दे खुदा मौजूद है जिसकी ये बरक़त है,फिर आप अलैहिस्सलाम ने रब से दुआ की कि उस मर्दे खुदा को ज़ाहिर फरमा तो पहाड़ फट गया और वो बुज़ुर्ग ज़ाहिर हुए उन्होंने कहा कि मैं हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की क़ौम से हूं मैंने रब से दुआ की थी कि मैं हज़रत मुहम्मद सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का दौर भी पाऊं ताकि मैं उनकी उम्मत में शामिल हो सकूं तो मैं अब तक 600 साल से इस पहाड़ के अंदर इबादत में मशगूल हूं,तब हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह से पूछा कि ऐ मौला क्या रूए ज़मीन पर इससे बढ़कर बुज़ुर्ग भी कोई शख्स मौजूद है तो रब तआला इरशाद फरमाता है की ऐ ईसा उम्मते मुहम्मदिया का जो फर्द भी माहे रजब का एक रोज़ा रख लेगा तो वो मेरे नज़दीक इससे भी बढ़कर बुज़ुर्ग होगा,सुब्हान अल्लाह सुब्हान अल्लाह

📕 नुज़हतुल मजालिस,जिल्द 1,सफह 130

मेरे आक़ा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि जो शख्स 27वीं रजब का रोज़ा रखेगा तो उसे 60 महीनो के रोज़े का सवाब मिलेगा

📕 गुनियतुत तालेबीन,जिल्द 1,सफह 182

इस महीने में 22 रजब को हज़रत इमाम जाफर सादिक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के नाम से कूंडे की नियाज़ होती है,इसके तअल्लुक़ से हुज़ूर ताजुश्शरीया व हुज़ूर मुहद्दिसे कबीर दामत बरक़ातोहुमुल आलिया फरमाते हैं कि "22 तारीख को सय्यदना अमीरे मुआविया रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की विसाल की तारीख है और शिया उस दिन उन पर तबर्रा बाज़ी करते थे तो हज़रत इमाम जाफर सादिक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने उस दिन सय्यदना अमीरे मुआविया रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की नियाज़ क़ायम फरमाई जिससे कि शियाओं को उन पर तबर्रा करने का मौक़ा ना मिले,यही नियाज़ आपके बाद आपकी तरफ मंसूब हुई लिहाज़ा 22 तारीख को कूंडा करने में कोई हर्ज नहीं बस शियाओं की मुशाबहत ना इख्तियार करे मसलन उनके यहां जहां पके वहीं खाया जाए वहीं हाथ धोया जाए घर से बाहर ना ले जाया जाए औरतें ना खाएं ये सब खुराफातें होती है तो ये सब मरदूद रस्में हैं सुन्नियों को इससे बचना ज़रूरी है*

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