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जिसने मुफ़्ती (आलिम ए दीन) के पीछे नमाज़ पढ़ी गोया उसने नबी के पीछे नमाज़ पढ़ी.




जिसने मुफ़्ती (आलिम ए दीन) के पीछे नमाज़ पढ़ी गोया उसने नबी के पीछे नमाज़ पढ़ी :


हदीस ➤  हज़रत अबू हुरैरा रज़ीअल्लाहु तआला अन्ह से मरवी है के हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:


जिसने आलिमों में से किसी आलिम के पीछे नमाज़ पढ़ी तो गोया उसने नबीयों में से किसी नबी के पीछे नमाज़ पढ़ी.

📚तफ़्सीर ए कबीर जिल्द 1 सफ़ा 275)



हदीस ➤ हज़रत जाबिर रज़ीअल्लाहु तआला अन्ह से रिवायत है के हुज़ूर सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया :


यक़ीनन जन्नती जन्नत में उल्मा के मोहताज होंगे और वो इसलिए के वो हर जुमा को अल्लाह के दीदार से सरफ़राज़ होंगे तो ख़ुदा ए तआला उनसे फ़रमाएगा जिस चीज़ की चाहो तमन्ना करो, तो वो लोग उल्मा के पास जाएंगे और उनसे पूछेंगे के हम किस चीज़ की तमन्ना करें, तो वो कहेंगे ख़ुदा ए तआला से ऐसी ऐसी तमन्ना करो, तो जन्नती जन्नत में आलिमों के मोहताज होंगे जैसा के दुनियां में वो उनके मोहताज हैं,

📚कन्ज़ुल उम्माल जिल्द 10. सफ़ा 86)


👉जानिये एक मुफ़्ती (आलिम ए दीन) की फ़ज़ीलत क्या है ?

👉जिसने एक मुफ़्ती (आलिम ए दीन) की ग़ीबत की वो अल्लाह की रहमत से दूर होगा।

👉जिसने किसी आलिम की तौहीन इस बिना पर की कि वो आलिमे दीन है काफिर है


हदीस ➤ हज़रत मुहम्मद बिन अली रज़ीअल्लाहु तआला अन्हुमा से मरवी है के हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया:


आलिम की दो (2) रकअत नमाज़ ग़ैर आलिम की सत्तर (70) रकअत से अफ़ज़ल है.

📚कन्ज़ुल उम्माल जिल्द 10 सफ़ा 87



हदीस ➤ हज़रत जाबिर रज़ीअल्लाहु तआला अन्ह से मरवी है के आक़ा ए दो जहां ने फ़रमाया:


ऐसा आलिम जो बिस्तर पर टेक लगाकर इल्म के बारे में ग़ौर व फ़िक्र करे उसकी एक साअत आबिद की सत्तर (70) साला इबादत से बेहतर है.

📚कन्ज़ुल उम्माल जिल्द 10 सफ़ा 87



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